IQNA

16:22 - June 03, 2019
समाचार आईडी: 3473645
अंतरराष्ट्रीय समूह- जैसे ही रमज़ान समाप्त होता है, दुनिया भर की मस्जिदें खुद को ईद-उल-फित्र की प्रार्थना के लिए तैयार करती हैं, जिसमें सऊदी अरब, पाकिस्तान, भारत और यूएई की कई मस्जिदों में नमाज़ियों के लिए सबसे अधिक क्षमता है।
IQNA की रिपोर्ट अरब समाचार के अनुसार, इस सप्ताह दुनिया भर की मस्जिदों में ईद-उल-फित्र की प्रार्थना में मुसलमान एकत्रित होंगे। यहाँ ईद अल-फ़ित्र प्रार्थना में सबसे बड़ी मस्जिदों में से कुछ हैं:
मस्जिद अल हराम
इस मस्जिद की तारीख पैगंबर इब्राहिम (अ.स) के समय की है, जिन्हों ने अपने बेटे इस्माइल (अ.स) की मदद से इसककी मूल इमारत का निर्माण किया। मस्जिद अल-हराम, जो काबे के चारों तरफ़ है, एक हरा गुंबद है जिसे पहली बार 1837 में इस रंग में किया गया था।
हज के दौरान, इस मस्जिद में 4 मिलियन नमाजज़ियों को स्वीकार करने की क्षमता है। इस मस्जिद में ईद-उल-फित्र के दिन 900 हजार लोग ईद अल-फित्र प्रार्थना करते हैं।
मस्जिद अल-नबी (pbuh)
इस मस्जिद का निर्माण इस्लाम के पैगंबर ने हिज्री के पहले साल में कराया था। पहली इमारत ए छत के बिना थी और प्रार्थना की जगह और एक सभा स्थल के रूप में उपयोग किया जाता था। पवित्र पैगंबर (pbuh) का मज़ार इस मस्जिद में कि शुरू में उनका घर था, है ।
1994 में, मस्जिद विकसित की गई थी और अब एक मिलियन उपासकों की क्षमता है।
फैसल मस्जिद, इस्लामाबाद, पाकिस्तान
 1969 में, 17 अंतरराष्ट्रीय वास्तुकारों के बीच मस्जिद को डिजाइन करने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता आयोजित की गई थी, अंत में तुर्की वास्तुकार वोदत दलोकाई की जीत हुई। इसका निर्माण 1976 में शुरू हुआ और 1986 में समाप्त हुआ।
इसे बनाने की लागत देने के कारण मस्जिद का नाम सऊदी अरब के राजा, राजा फैसल के नाम पर रखा गया था। फैसल मस्जिद में 100,000 प्रार्थना करने वालों की क्षमता है।
शेख ज़ायद मस्जिद, अबू धाबी
इस मस्जिद को सीरियाई वास्तुकार यूसुफ अल-अब्देल्की ने डिजाइन किया और 1996 से 2007 के दौरान बनाई गई। इस मस्जिद की वास्तुकला तुर्की, मोरक्को, पाकिस्तान और मिस्र की वास्तुकला का संयोजन है। यूएई की सबसे बड़ी मस्जिद, मस्जिद में ईद अल-फित्र प्रार्थना के लिए 40,000 प्रार्थना करने वालों की क्षमता है।
दिल्ली जामा मस्जिद
दिल्ली जामे मस्जिद के रूप में जानी जाने वाली जहानुमा मस्जिद की इमारत, भारत के मंगोल साम्राज्य के "शाहजहाँ" युग (ग्यारहवीं शताब्दी एएच) में लौटती है। मस्जिद का निर्माण 1060 हिज्री में शुरू हुआ और 1066 हिज्री में पूरा हुआ। मस्जिद में 25 हजार उपासकों की क्षमता है।
 3816862
नाम:
ईमेल:
* आपकी टिप्पणी :