IQNA

20:45 - August 10, 2019
समाचार आईडी: 3473867
बिस्मिल्लाहिर-रहमानिर-रहीम वल्हम्दो लिल्लाह रब्बिल-आलमीन व सल्लल्लाहु अला रसूलेहिल-करीम अल-अमीन, मोहम्मद ख़ातमुन्नबीय्यीन व अला आलेहिल-मुतह्हरीन सिय्यमा बक़ीयतेल्लाहे फ़िल अरज़ीन व अला अस्हाबेहिल-मुन्तजबीन व मन तबेअहुम बे ऐह्सानिन इला यौमिद्दीन।

हर साल हज की तीर्थयात्रा इस्लामिक उम्मत पर प्रभु के आशीर्वाद की वादगाह है। व अज़्ज़िन फ़िन्नासे बिलहज्जे’ की कुरानिक पुकार, इस रहमत के दस्तरख़्वान पर पूरे इतिहास में सब को निमंत्रण है ताकि वह दिल और आत्मा ईश्वर को तलाश करें और अपपने ज्ञान और बुद्धि दोनों से इसकी बर्कतों से लाभान्वित हों, और हर साल हज की शिक्षाएं और उपदेश लोगों के समूहों द्वारा इस्लामी दुनिया के लोगों तक पहुँचे।
हज में, ज़िक्र और इबादत का अमृत, जो व्यक्ति और समाज की परवरिश और उन्नति में एक महत्वपूर्ण तत्व है, जो इज्तेमाअ और एकता के साथ-कि एकजुट राष्ट्र का प्रतीक है, और साथ ही एकता के केंद्र के चारों ओर हर्कत और एक सामान्य लक्ष्य के साथ ऐक रास्ते में जो तौहीद की स्तंभों के आधार पर उम्मत के प्रयास और तलाश की कुंजी है। और तीर्थयात्रा की समानता और भेद की कमी के साथ जो भेदभाव के उन्मूलन और अवसरों के सामान्यीकरण का संकेत देता है, यह एक छोटे से अर्थ में इस्लामी समाज की मूल नींव है। हज के आमाल में इहराम और तवाफ़ व सई व वक़ूफ़ व रम्य व हर्कत व सुकून में से प्रत्येक, ऐक तस्वीरी हिस्से का प्रतीकात्मक संदर्भ है जो इस्लाम ने अपने को इस वांछित समुदाय के ज़रये प्रस्तुत किया है।
लोगों और देशों के बीच ज्ञान और संपत्ति का आदान-प्रदान, और ज्ञान और अनुभवों का प्रसार, और एक-दूसरे की स्थिति का ज्ञान तथा निगरानी, और ग़लतफ़हमियों को खत्म करना और दिलों को निकट करना और कॉमन दुश्मनों से निपटने के लिए शक्ति का संचय, हज की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। वह सैकड़ों साधारण और राएज सभाओं के साथ हासिल नहीं किया जा सकता है।
घृणा का अनुष्ठान, जो हर समय सभी बरहमियों, अत्याचारों, कुरूपताओं और ज़ालिमों के भ्रष्टाचारों से नफ़रत है और युग के अभिमानी व बदमाश लोगों की फिरौती व धमकियों के खिलाफ़ खड़ा होना है, महान हज के आशीर्वाद में से ऐक है और उत्पीड़ित मुस्लिम राष्ट्रों के लिए एक अवसर है। आज, अभिमानी लोगों के शिर्क व कुफ़्र से घृणा जिसमें सबसे पहले अमेरिका, इसका का मतलब है, मज़्लूम कुशी और जंग भड़काने से घृणा व बेज़ारी है; यानी दाइश और अमेरिकी ब्लैकवाटर जैसे आतंकवादी केंद्रों की निंदा करना। जिसका अर्थ सह्यूनी बाल दमनकारी शासन व उसके समर्थकों व सहयोगियों के सर पर इस्लामी उम्म की हैबत है यानि पश्चिम एशिया और उत्तरी अफ्रीका के संवेदनशील क्षेत्र में अमेरिका और उसके सहयोगियों की युद्ध फैलाने की नीति की निंदा है, जिसने राष्ट्रों की पीड़ा व कड़वाहट को अंत तक पंहुचा दिया और हर दिन उन पर गंभीर समस्याओं को पैदा किया है, जिसका अर्थ भूगोल और नस्ल और त्वचा के रंग पर आधारित जातिवाद और भेदभाव से घृणा है। जिसका अर्थ आदेलाना और कुलीनों व शरीफ़ लोगों के व्यवहार के सामने आक्रामक और देशद्रोही व अभिमानी शक्तियों के बर्बर व्यवहार से घृणा है कि इस्लाम सभी को इसकी दावत देता है।
ये इब्राहीम तीर्थयात्रा के कुछ बर्कतें हैं जो शुद्ध इस्लाम ने हमें उसकी ओर बुलाया है, और यह इस्लामी समाज के आदर्शों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जो हर साल मुस्लिम लोगों द्वारा निर्मित हज, विशाल और विषयगत शो द्वारा निर्देशित होता है, और बोलती ज़ुबान में, हर किसी को ऐसा समाज बनाने के लिए प्रयास करने के लिए कहता है।
मुस्लिम दुनिया के कुलीन, दुनिया भर के लोगों का एक समूह अब तीर्थ यात्रा में भाग ले रहा है, एक कठिन कार्य को अंजाम दे रहा है। इन पाठों को उनके प्रयास और पहल से राष्ट्रों और जनता को अवगत कराया जाना चाहिए, और उनके विचारों, प्रेरणाओं, अनुभवों और ज्ञान के आध्यात्मिक आदान-प्रदान को महसूस किया जाए।
आज, मुस्लिम दुनिया में सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक फिलिस्तीनी मुद्दा है, जो किसी भी धर्म, जाति या भाषा के मुसलमानों के सभी राजनीतिक मुद्दों में सबसे आगे है। हाल की सदियों की सबसे बड़ी क्रूरता फिलिस्तीन में हुई है। इस दर्दनाक घटना में, एक राष्ट्र की सब कुछ - उसकी भूमि, उसके घर और खेत और उसकी संपत्ति, उसकी गरिमा और पहचान - को जब्त कर लिया गया है। इस राष्ट्र ने ईश्वर द्वारा पराजय स्वीकार नहीं की है और वह निराशा नहीं हुई है और कल की तुलना में आज क्षेत्र में अधिक साहसी और शुजाआना है, लेकिन काम के परिणाम के लिए सभी मुसलमानों की मदद की आवश्यकता है। सदी के सौदे की चाल, जो दमनकारी अमेरिका और उसके गद्दार साथियों द्वारा छेड़ी जा रही है, केवल फिलिस्तीनी राष्ट्र नहीं, मानव समाज के खिलाफ ऐक गंभीर अपराध है। हम सभी को इस धोके और फ़रेब को असफल बनाने के लिए सक्रिय रूप से शामिल होने का आह्वान करते हैं, और ईश्वरीय इच्छा और प्रतिरोध मोर्चे की कड़ी मेहनत और विश्वास के मुक़ाबिल अन्य सभी घमंडी चालों की निंदा करते हैं।
क़ालल्लाहुल अल-अज़ीज़: अम युरीदूना कैदन फ़ल्लज़ीना कफ़रू हुमुल मकीदून। सदक़ल लाहुल अज़ीम। मैं भगवान से सभी सम्मानजनक तीर्थयात्रियों के लिऐ आशीर्वाद, आफ़ियत, तौफ़ीक़ और इबादतों की क़ुबूलियत की दुआ करता हूं।
सय्यदद अली ख़ामेनई
5 अगस्त 2019 मुताबिक़ 3 ज़िल्हिज 1440

नाम:
ईमेल:
* आपकी टिप्पणी :